दुल्हन के पिता ने दिया नोटों के बंडल से भरी थाली, दूल्हे ने किया कुछ ऐसा की हैरत में पड़ जाएंगे

ये बात तो आप सभी जानते ही होंगे कि शादी के वक्त या बाद जब वधू के पिता की ओर से कुछ सामान या पैसा दिया जाता है तो वह दहेज कहलाता है। दहेज का मतलब किसी चीज की मांग करने से है। दहेज़ प्रथा सदियों से हमारे देश में चली आ रही है। लेकिन, पहले दहेज प्रथा का रुप इतना भयंकर नहीं था कि कोई पिता अगर अपनी बेटी को दहेज न दे सके तो उसे जला दिया जाये। आज दहेज लोभियों के लिये दहेज एक प्रकार का व्यापार बन गया है।
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पहले जहां लड़की अपने मायके से दहेज में अपने साथ जरुरत की चीजे लाती थी, जिनमें कुछ पालतू जानवर या कोई ऐसी चीज होती थी जो उसके इस्तेमाल की हो। यह एक भेंट के जैसे होता था। लेकिन, आज भारतीय समाज में यह एक सबसे बड़ा कलंक हो गया है। हालांकि, यह प्रथा काफी प्राचीन है इसलिए इसकी जड़े समाज के हर वर्ग तक पहुंच चुकी है। चाहे अमिर हो या फिर चाहे गरीब हर कोई दहेज ले रहा है। आज समाज में देखा जाता है की लड़का अगर अच्छा कमा रहा है तो दहेज की डिमांड ज्यादा हो जाती है। आज दहेज एक सौदा बन चुका है।
लेकिन, आज हम आपको एक ऐसा वाकया बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। भले ही आपने दहेज के किस्से बहुत सुने होंगे जिसके चक्कर में न जाने कितनी दुल्हनों को जिंदा जला दिया गया हो। लेकिन, आज हम एक ऐसे दूल्हे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने दहेज लोभियों को एक आइना दिखाया है। इस दुल्हे ने दहेज प्रथा के खिलाफ जिस तरह से आवाज उठाई है उसे जानकर आप भी उसकी तारीफ करेंगे। यह घटना राजस्थान के कोलाली गांव की है, जहां दहेज प्रथा अपने चरम पर है। लेकिन, यहां के रहने वाले जयदीप सिंह ने अपनी शादी में दहेज लेने से इनकार कर समाज को आइना दिखाने का काम किया है।
दरअसल, बिते मंगलवार को राजस्थान के कोलाली गांव के दिलीप सिंह की बेटी पल्लवी कंवर की शादी नागौर जिले के रहने वाले जयदीप सिंह के साथ हो रही थी। इसी दौरान दुल्हन के पिता ने एयरफोर्स में नौकरी कर रहे दूल्हे को शगुन के रूप में एक थाल में पांच लाख रुपए कैश रखकर उन्हें देने लगे। इस पर दूल्हे ने हाथ जोड़कर पैसे लेने से इंकार कर दिया। यह देख वहां मौजूद सभी लोग हैरान गए गए।
हालांकि, इसके बाद दुल्हन के पिता ने कई बार दहेज लेने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। जयदीप ने कहा की दहेज समाज के लिए एक अभिशाप है। मैं ये पैसे नहीं ले सकता। जयदीप के इस कदम की पूरा गांव और आसपास के लोग तरीफ कर रहे हैं। दरअसल, जयदीप अपने इस कदम के जरिए समाज को संदेश देना चाहते हैं कि कोई भी अपनी बेटियों को बोझ न समझें। इस तरफ जहां आजकल लड़की के माँ-बाप को हताश होकर दुल्हे के घरवालों को ज्यादा दहेज देना पडता है तो वहीं जयदीप का यह कदम काफी सराहनीय है।