7 साल के बाद अभी भी पता नहीं चला की कैसे हुई नवरुणा की मौत, CBI भी परेशान

मुजफ्फरपुर के नवरुणा के अपहरण की घटना को आज सात साल पूरे हो गए। हैरानी की बात यह है कि साढ़े पांच साल से इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है, लेकिन अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। सीबीआई को जांच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अब तक आठ डेडलाइन दी है। तीन माह की आठवीं डेडलाइन उसे 21 अगस्त को मिली है। हर बार ऐसा लगता है कि शायद इस बार सीबीआई मामले को सुलझा लेगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।

तीन एजेंसियों ने की मामले की जांच
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नवरुणा मामले की जांच तीन एजेंसियों ने की। शुरू में इस मामले की जांच नगर थाना पुलिस ने की। उसने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद मामले की जांच सीआइडी को दी गई, लेकिन नतीजा नहीं आने पर सरकार ने सीबीआई को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। फरवरी 2014 से इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

अगस्त 2019 में आठवीं डेडलाइन पूरी हुई
इस दौरान सीबीआई ने तीन सौ से अधिक लोगों से पूछताछ की। जांच को गति देने के लिए सीबीआई ने शहर में कैंप कार्यालय तक खोला। एक दर्जन से अधिक लोगों का पॉलीग्राफी और नार्को टेस्ट कराया गया। फिर भी किसी तरह का सुराग हाथ नहीं लगा। इसी साल अगस्त में पूरी हुई तीन महीने की आठवीं डेडलाइन में सीबीआइ चुप्पी साधे रही। सातवीं डेडलाइन के लिए दाखिल अर्जी में सीबीआई ने दावा किया था कि अपहरण के 50 दिनों बाद तक नवरुणा जीवित थी। बता दें कि 18 सितंबर 2012 की रात नगर थाने के जवाहरलाल रोड स्थित आवास से सोई अवस्था में नवरुणा गायब हो गई थी। ढाई माह बाद उसके घर के पास नाले से एक कंकाल मिला था। डीएनए टेस्ट के बाद कहा गया था कि कंकाल नवरुणा का ही है।