औरतों को सरकारी कार्यक्रम में बुलाया, खाने के साथ फोटो खींचा और खाली पेट ही वापस भेज दिया

पश्चिम बंगाल में नादिया जिला है. यहां समेकित बाल विकास सेवा का एक प्रोग्राम था. नाम था पोषण जागरुकता कार्यक्रम. इस कार्यक्रम में 20 गर्भवती महिलाएं शामिल हुई थीं. सरकारी अधिकारियों ने इनके साथ जो किया वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है. इस सरकारी कार्यक्रम में एक थाली सजाई गई. तरह-तरह के पकवानों से भरी. इस थाली में दाल, चावल, फल, कई तरह की सब्जियां परोसी गईं. इसके बाद शुरू हुई बेशर्मी.
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कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने एक-एक कर सभी गर्भवती महिलाओं को बुलाया और थाली के सामने बैठाकर उनकी तस्वीरें लीं. प्रेगनेंट औरतों को खाने की तरफ हाथ बढ़ाते हुए पोज देने को कहा गया. लेकिन उन्हें बार-बार टोका गया कि खाना हाथ से छूना नहीं है. क्योंकि थाली सिर्फ तस्वीरें खिंचवाने के लिए सजाई गई है. कार्यक्रम में ये घटियापन काफी देर तक चलता रहा. इसके बाद अधिकारियों ने थाली को वहां से हटा दिया. आखिर में प्रेगनेंट महिलाओं को खाने का पैकेट देकर वहां से रवाना कर दिया गया. उनसे कहा गया कि उस पैकेट को घर जाकर ही खोलें. घर जाकर देखा तो उस पैकेट में सिर्फ पका चावल और उबला अंडा था.
25 साल की मौमिता सात महीने की गर्भवती हैं. वो भी इस सरकारी कार्यक्रम में पहुंची थीं. उन्होंने बताया कि खाने की थाली के साथ तस्वीरें लेते समय उन्हें अचानक से कहा गया कि खाने की थाली को हाथ मत लगाना. उन्हें अधिकारियों का ये व्यवहार बहुत असंवेदनशील लगा. बाद में उन्होंने पैकेट लेने से मना कर दिया और घर आ गईं. इसके बाद उनके पति बिस्वजीत संधूखान ने अधिकारियों के व्यवहार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. मौमिता और बिस्वजीत की शिकायत के बाद कई और लोग भी अधिकारियों के इस रवैये के विरोध में आए हैं.
वहीं समेकित बाल विकास सेवा के अधिकारी का कहना है कि महिलाओं को गलतफहमी हुई है. डिब्बे में वही भोजन दिया गया, जो इन कार्यक्रमों में मिलता है. थाली में सजा भोजन महिलाओं को समझाने के लिए था कि उन्हें प्रेग्नेंसी में दाल, सब्जी, फल वगैरह खाना चाहिए. अधिकारी ने ये भी कहा कि वह कर्मचारियों से बात कर चुके हैं, ताकि इस तरह की गलतफहमी दोबारा न हो. फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है.