एक ही घर की दोनों बेटियां हुई एक साथ रवाना, लेकिन एक शादी की डोली में और एक चार कंधो पर

दरअसल, ये मामला ताजनगर के रिटायर्ड फौजी घर का है. जहाँ वीरेंद्र सिंह के परिवार में खुशियों की जगह मातम का माहोल छा गया. जानकारी के अनुसार वीरेंद्र के पांच बच्चे थे. जिनमे से चार बेटियां और एक बेटा है. करीबन 12 साल पहले ही उन्होंने अपनी बड़ी बेटी नीरज की शादी पुष्पेंद्र नामक फौजी से करवा दी थी. इसके बाद से ही नीरज को अक्सर दहेज़ के बारे में तान्हे मिला करते थे. वीरेंद्र ने अभी अपनी तीसरी बेटी शालू की शादी 23 नवम्बर को तय की थी. लेकिन, कोई नहीं जनता था कि ये शादी की खुशियाँ उनके पास बहुत सारे दुःख लेकर आ रही हैं।
loading...
दरअसल 18 तारीख को इस शादी के माहोल में वीरेंद्र सिंह ने अपने दामाद को लग्न के तौर पर सोने की अंगूठी पहनाई थी. जिसके बाद उनका बड़ा दामाद पुष्पेंद्र गुस्से से पागल हो गया और उसने वीरेंद्र का गला पकड़ लिया. काफी बहस के बाद जैसे तैसे माहोल को शांत किया गया. लेकिन 20 तारिख को पुष्पेंद्र ने अपने परिवार के साथ मिल कर उनकी बेटी नीरज को जिंदा जला डाला. जिसके बाद उसको अस्पताल पहुँचाया गया था. शालू की शादी वाले दिन ही उनकी बड़ी बेटी ने अस्पताल में अपना दम तोड़ दिया. जिससे खुशियाँ का ये माहोल आंसूओं में बदल गया.
जहाँ 23 तारीख वाले दिन वीरेंद्र के घर में खुशियों की शेहनाई बज रही थी, वहीँ उन्हें बेटी नीरज की मौत की सूचना प्राप्त हो गयी. जिसके बाद एक बेटी के फेरे चल रहे थे तो दूसरी संसार त्याग चुकी थी. शादी में मौजूद सभी लोग ना हंस पा रहे थे ना रो पा रहे थे. एक बाप के लिए इससे अधिक दुःख भला क्या हो सकता था कि एक बेटी को डोली में बिठा रहा था और दूसरी को कंधो पर लेजाना बाकी था. ऐसा माहोल देख वहां मौजूद सभी लोग पुष्पेंद्र को अपनी हाय दे रहे थे और कह रहे थे कि ” ऐसा कभी किसी के साथ ना हो”.
फिलहाल नीरज के ससुराल वाले फरार हैं. वहीँ मामला पुलिस को सौंप दिया गया है. पुलिस ने अभी 307 धारा की तहत पुष्पेंद्र और उसके परिवार की तलाश शुरू कर दी है. वीरेंद्र सिंह की सरकार से एक ही मांग है कि जसी प्रकार उसकी बेटी तड़प तड़प कर मरी है उसी प्रकार सरकार पुष्पेंद्र को भी मरने पर मजबूर करदे.