‘पापा-मम्मी, मेरी सुसाइड की वजह मेरे स्कूल टीचर हैं, वो हमेशा मुझको..’ लिखकर छात्रा ने कर लिया सुसाइड

जालंधर के केएमवी स्कूल की 10वीं की स्टूडेंट तन्वी ने बुधवार को अपने ही कपूर कॉलोनी स्थित घर में फंदा लगाकर खुदकुशी कर लिया। उसके पास से 3 पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उसने आरोप लगाया कि वह केएमवी संस्कृति स्कूल के मैथ्स टीचर नरेश कपूर से तंग आकर जान दे रही है। पुलिस ने 32 साल के टीचर नरेश को गिरफ्तार भी कर लिया है। 
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थाना रामामंडी में आरोपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज हुआ है। एसएचओ जीवन सिंह ने कहा-सुसाइड नोट को हैंड राइटिंग एक्सपर्ट के पास भेजा जा रहा है। उधर, स्कूल मैनेजमेंट ने टीचर को सस्पेंड कर दिया है। पिता राजेश मेहता ने बताया,उनकी बेटी ने मंगलवार रात साथ में डिनर किया। रात 11 बजे बेडरूम में गई। बुधवार सुबह 7 बजे देखा तो वो फंदा लगाकर लटकी हुई थी। बेटी को नीचे उतारा तो लेकिन उसकी सांसें खत्म हो चुकी थीं। बेटी के सुसाइड नोट में 5 जनवरी की डेट थी।

लिखा था 3 पेज का सुसाइड नोट
''मम्मी-पापा, मैं अपनी मर्जी से सुसाइड नहीं कर रही। इसके पीछे एक बड़ा कारण है। वो है मेरे स्कूल टीचर नरेश कपूर। मम्मा, वो हमेशा मुझे कुछ न कुछ बोलते रहते हैं। स्कूल में वो मुझे ही डांटते रहते हैं। चाहो तो तुम मेरी किसी भी सहेली से पूछ लो।नरेश सर किसी और का गुस्सा मुझ पर ही उतारते हैं। अपने क्लास में सारे बच्चों को डराकर रखा है।''

''मम्मा, मैं उन्हीें के डर से स्कूल नहीं जाती थी। तुम पूछती हो न कि तेरा पढ़ाई में दिल क्यों नहीं लगता है। मम्मा, मैं तुम्हें क्या बताऊं। क्लास की बातें सोच-सोच कर मेरा दिल घबराता है। वो किसी भी बच्चो के मुंह पर जोर से तमाचा मार देते हैं। मुझे उनसे बहुत डर लगता है। मैं उनकी वजह से बहुत ही रोती हूं। मेरी सहेलियों से पूछ सकती हो। मेरे पास सुसाइड करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा।''

आरोपी टीचर बोला- मैंने कभी तन्वी को नहीं किया टार्चर
नरेश कपूर 6 साल से स्कूल में मैथ्स टीचर हैं। उनकी मैरिज अभी 25 जनवरी को एलपीयू की प्रोफेसर वनीता से हुई थी। पूछताछ में नरेश ने दावा किया कि तन्वी मैथ्स में वीक थी। एग्जाम में एक बार 80 में से 3 और एक बार 8 मार्क्सआए थे। रहा सवाल टॉर्चर करने का, तो आरोप गलत है।

‘ट्यूशन रखने का दबाव भी बनाते थे टीचर’

तन्वी की क्लासमेट ने बताया है कि टीचर नरेश कपूर बच्चों को ट्यूशन रखने के लिए भी कहा करते थे। जो स्टूडेंट उनके पास ट्यूशन नहीं रखता तो वे डांटते थे। तन्वी को भी वे ट्यूशन रखने के लिए कह रहे थे।