मोदी सरकार ने तीन अख़बारों को सरकारी विज्ञापन देना बंद कर दिया...!

केंद्र सरकार ने देश में कम से कम 3 बड़े अखबारों को ऑफिस सरकारी विज्ञापन देने से बंद कर दिया और विपक्ष के एक नेता का कहना है कि ऐसा करके सरकार के विरुद्ध की गई रिपोर्टिंग के प्रतिक्रिया को लेकर किया गया। आपको बता दें कि मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार आलोचक लगातार कहते रहे कि वर्ष 2017 से ही संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में मीडिया की स्वतंत्रता खतरे में रही है। वही पत्रकारों ने इसकी शिकायत की है। इसके अलावा कई मौकों पर यह भी खबर आई है कि आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करने के वजह से कई पत्रकारों को डराया और धमकाया भी जाता है।
वह इसके अलावा उन्होंने कहा था कि सरकारी विज्ञापन रोकने की अलोकतांत्रिक और अहंकारी प्रवर्ती सरकार का मीडिया को उसकी लाइन बदलने के लिए एक संदेश है वहीं सामूहिक रूप से करीब 2.6 करोड़ मासिक पाठक वर्ग वाले 3 बड़े अखबार समूह का कहना है कि मोदी के पिछले महीने लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से चलकर सत्ता में आने से पहले ही उनके करोड़ों रुपए के विज्ञापनों को बंद कर दिया गया था।

वहीं आपको बता दें कि देश के सबसे बड़े अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की मालिकाना कंपनी बेनेट कोलमैन एंड कंपनी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडियम संस्थानों को यह बताया है कि सरकारी विज्ञापन बंद कर दिया गया है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि विज्ञापन बंद होने के वजह से कुछ ऐसी रिपोर्ट सो सकती है जो उन्हें पसंद ना आई हो।

इसके अलावा उस अधिकारी के हवाले से मीडिया में यह खबर भी आई है कि टाइम समूह के करीब 15% विज्ञापन सरकार से आते हैं और इन विज्ञापनों में अधिकतर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सरकारी टेंडर्स और सरकारी योजनाओं के प्रचार शामिल होते हैं। वहीं बीपी ग्रुप की भी एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को बताया है कि जब आप सरकार के विरुद्ध कुछ भी बोलते हैं। तो जाहिर है कि वह आपको किसी ने किसी तरीके से नुकसान पहुंचाते हैं। वही अंग्रेजी अखबार द हिंदू को मिलने वाले सरकारी विज्ञापनों में भी कमी देखने को मिली है। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा है कि फ्रांस की रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले विज्ञापनों में कमी देखी गई है।