हमेशा हंसता मुस्कुराता रहता था ये व्यक्ति, इनके बारे में जानकर हैरान हो जाएंगे आप

श्लिट्ज़ी नाम के इस व्यक्ति का नाम जितना बोलने में कठिन है उससे भी अधिक कठिन इस व्यक्ति की ज़िंदगी थी। श्लिट्ज़ी को एक ऐसी बीमारी थी जिसमें वह अपनी जवानी के उम्र में भी एक 3 वर्ष के बच्चे की तरह ही सोच पाता था। 
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वह सिर्फ छोटे-छोटे वाक्यांशों में बात किया करता था। एक लड़की की पोशाक पहन वह सारी ज़िंदगी लोगों के मनोरंजन के लिए नाटक करता रहा। श्लिट्ज़ी microcephaly नाम की एक बीमारी से ग्रसित था। इस बीमारी में मस्तिष्क , दिमाग और शरीर के अंग आड़े-टेढ़े हो जाते हैं।
इस बीमारी में व्यक्ति की सीखने की क्षमता, सुनने और बोलने की क्षमता नाम सिर्फ की हो जाती है। कुछ जानकारों का कहना है कि श्लिट्ज़ी का जन्म 1901 में हुआ था। श्लिट्ज़ी की इस हालत की कारण से उसे कोई पालना नहीं चाहता था। फिर एक सर्कस में उसे "द मंकी गर्ल" का किरदार निभाने का काम मिला। लोगों को उसके शोज तो पसंद आते थे, किन्तु कभी उसे किसी ने अपनाया नहीं। 
सर्कस के इस शो की सफलता के बाद उसे एक फिल्म में कार्य करने को भी मिला। श्लिट्ज़ी की इस फिल्म के बाद उसे बंदरों के एक ट्रेनर ने गोद ले लिया। सुरतीस नाम के इस ट्रेनर ने श्लिट्ज़ी को बहुत प्यार दिया, किन्तु एक दिन सुरतीस की देहांत हो गई। सुरतीस की बेटी ने उसकी मौत के बाद श्लिट्ज़ी को एक मेंटल हॉस्पिटल भेज दिया।
श्लिट्ज़ी वहां 3 वर्ष था और धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ने लगी। श्लिट्ज़ी सर्कस की ज़िंदगी को याद कर उदास रहने लगा। उसकी बिगड़ती हालत को देख हॉस्पिटल ने उसे फिर से शोज करने की अनुमति  दे दी। कुछ दिनों सर्कस में कार्य करने के बाद श्लिट्ज़ी रिटायर हो गया, किन्तु वह हमेशा की अपनी ज़िंदगी में दुखी ही रहा। 
लोगों को हंसाने वाला श्लिट्ज़ी अब हताश हो चुका था। 70 की आयु में आखिरकार श्लिट्ज़ी इस दुनिया को अलविदा कह गया। जब उसे दफनाया गया तो उसकी कब्र पर उसका नाम तक नहीं लिखा गया था। 2007 में श्लिट्ज़ी के एक प्रसंशक ने उसकी कब्र पर उसका नाम लिखवाया जिसके बाद वह फिर से खबरों में आ गया।